भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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१८६ ] धम्मपदं [ २६।४० ( यस्य गतिं न जानन्ति देव-गंधर्व-मानुषाः । क्षीणास्रवं अरहन्तं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३८॥ ) अनुवाद—जिसकी गति(=पहुँच) को देवता, गंधर्व, और मनुष्य नहीं जानते, जो क्षीणास्रव (=रागादिरहित ) और अर्हत् है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ । राजगृह ( वेणुवन ) धम्मदिन्ना ( थेरी ) ४२१-यस्स पुरे च पच्छा च मज्झे च नत्थि किञ्चनं । अकिञ्चनं अनादानं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥३६॥ ( यस्य पुरश्च पश्चाच्च मध्ये च नाऽस्ति किंचन । अकिंचनं अनादानं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३९॥ ) अनुवाद— जिसके पूर्व, और पश्चात् और मध्यमें कुछ नहीं है, जो परिग्रहरहित=आदानरहित है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ । जेतवन अङ्गुलिमाल ( थेर ) ४२२-उसभं पवरं वीरं महेसिं विजिताविनं । अनेजं नहातकं बुद्धं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥४०॥ ( ऋषभं प्रवरं वीर महर्षि विजितवन्तम् । अनेजं स्नातकं बुद्धं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥४०॥ ) अनुवाद—( जो ) ऋषभ (= श्रेष्ठ ), प्रवर, वीर, महर्षि, विजेता, अकम्प्य, स्नातक और बुद्ध है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।