भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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२० ] धम्मपद [ ३।११ कोसल देश नन्द (गोप) ४२-दिसो दिसं यन्तं कयिरा वेरी वा पन वेरिनं । मिच्छापणिहितं चित्तं पापियो'नं ततो करे ॥१०॥ ( द्विट् द्विषं यत् कुर्यात् वैरी वा पुनः वैरिणम् । मिथ्याप्रणिहितं चित्तं पापीयांसं एनं ततः कुर्यात् ॥१०॥ ) अनुवाद—जितनी ( हानि ) शत्रु शत्रु की, और वैरी वैरी की करता है, झूठे ( मार्गपर ) लगा चित्त उससे अधिक बुराई करता है। कोसल देश सोरय्य (थेर) ४३-न तं माता पिता कयिरा अन्ने चापि च जातका । सम्मापणिहितं चित्तं सेय्यसो'नं ततो करे ॥११॥ ( न तत् मातापितरौ कुर्यातां अन्ये चापि च ज्ञातिकाः । सम्यक्प्रणिहितं चित्तं श्रेयांसं एनं ततः कुर्यात् ॥११॥ अनुवाद—जितनी ( भलाई ) न माता-पिता कर सकते हैं, न दूसरे भाई-बन्धु; उससे ( अधिक ) भलाई ठीक ( मार्गपर ) लगा चित्त करता है। ३—चित्तवर्ग समाप्त