धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ ] धम्मपदं [ ४।४ अनुवाद—शैक्ष¹ देवताओं सहित इस यमलोक और पृथिवीको विजय करेगा। चतुर शैक्ष सुन्दर प्रकारसे उपदिष्ट धर्मके पदोंको पुष्पकी भाँति चयन करेगा। श्रावस्ती मरीचि ( कम्मट्ठानिक थेर ) ४६—फेणूपमं कायमिमं विदित्वा मरीचिधम्मं अभिसम्बुधानो ; छेत्वान मारस्स पपुप्फकानि अदस्सनं मच्चुराजस्स गच्छे ॥३॥ (फेनोपमं कायमिमं विदित्वा मरीचिधर्मं अभिसम्बुधानः । छित्त्वा मारस्य प्रपुष्पकाणि अदर्शनं मृत्युराजस्य गच्छेत् ॥ ३ ॥) अनुवाद—इस कायाको फेनके समान जान, या ( मरु-) मरीचिका के समान मान, फन्देको तोडकर, यमराजको फिर न देखनेवाले बनो। श्रावस्ती विडूडभ ४७-पुप्फानि हेव पचिनन्तं व्यासत्तमनसं नरम् । सुत्तं गामं महोघो'व मच्चू आदाय गच्छति ॥ ४॥ ¹ निर्वाणके मार्गपर जो इस प्रकार आरूढ हो गये हैं, कि फिर उनका उससे पतन नहीं हो सकता, ऐसे पुरुषको शैक्ष कहते हैं। उनके तीन भेद हैं— स्रोतआपन्न, सकृदागामी, अनागामी ।