धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३० ] धम्मपदं [ ५।७ श्रावस्ती ( जेतवन ) उदायी ( थेर ) ६४-यावजीवम्पि चे बालो पण्डितं पयिरुपासति । न सो धम्मं विजानाति दब्बी सूपरसं यथा ॥ ५॥ ( यावज्जीवमपि चेद् बालः पंडितं पर्युपास्ते । न स धर्मं विजानाति दर्वी सूपरसं यथा ॥५॥ ) अनुवाद—चाहे बाल ( = जड; अज्ञ ) जीवन भर पंडितकी सेवामें रहे ( तो भी ) वह धर्मको ( वैसे ही ) नहीं जान सकता, जैसे कि कलछी ( = दब्बी = दयली ) सूप ( = दाल आदि ) के रसको । श्रावस्ती ( जेतवन ) भद्रवर्गीय ( भिक्षुलोग ) ६५-मुहुत्तमपि चे विञ्ञू पण्डितं पयिरुपासति । खिप्पं धम्मं विजानाति जिह्वा सूपरसं यथा ॥६॥ ( मुहूर्त्तमपि चेद् विज्ञः पंडितं पर्युपास्ते । क्षिप्रं धर्मं विजानाति जिह्वा सूपरसं यथा ॥६॥ ) अनुवाद—चाहे विज्ञ ( पुरुष ) एक मुहूर्त ही पंडितकी सेवामें रहे, ( तो भी वह ) शीघ्र ही धर्मको जान सकता है, जैसे कि जिह्वा सूपके रसको । राजगृह ( वेणुवन ) सुप्पबुद्ध ( कोढ़ी ) ६६-चरन्ति बाला दुम्मेधा अमित्तेनेव अत्तना । करोन्तो पापकं कम्मं यं होति कटुकप्फलं ॥७॥ ( चरन्ति बाला दुर्मेधसोऽमित्रेणेवात्मना । कुर्वन्तः पापकं कर्म यद् भवति कटुकफलम् ॥७॥ )