धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५।२ ] बालवग्गो [ २९ अनुवाद—यदि विचरण करते अपने अनुरूप भलेमानुषको न पाये, तो दृढ़ताके साथ अकेला ही विचरे, मूर्खसे मित्रता नहीं निभ सकती । श्रावस्ती आनन्द ( सेठ ) ६२—पुत्ता म'त्थि धनम्म'त्थि इति बालो विहञ्ञति । अत्ता हि अत्तनो नत्थि कुतो पुत्तो कुतो धनं ॥३॥ ( पुत्रा मे सन्ति धनं मे ऽस्ति इति बालो विहन्यते । आत्मा हि आत्मनो नास्ति कुतः पुत्रः कुतो धनम् ॥३॥ ) अनुवाद—"पुत्र मेरा है", "धन मेरा है" ऐसा ( करके ) अज्ञ ( नर ) उत्पीड़ित होता है, जब आत्मा ( = शरीर ) ही अपना नहीं, तो कहाँसे पुत्र और धन ( अपना होगा ) । जेतवन गिरहकट चोर ६३—यो बालो मञ्ञती बाल्यं पण्डितो चापि तेन सो । बालो च पण्डितमानी, स वे बालो'ति वुच्चति ॥४॥ ( यो बालो मन्यते बाल्यं पण्डितश्चापि तेन स । बालश्च पंडितमानी स, वै बाल इत्युच्यते ॥४॥ ) अनुवाद—जो ( कि वह ) अज्ञ होकर ( अपनी ) अज्ञताको जानता है, इस ( अंश ) से वह पंडित ( = जानकार ) है । वस्तुतः अज्ञ होकर भी जो पंडित होनेका दम भरता है, वही अज्ञ ( =बाल ) कहा जाता है ।