धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
DevanagariHindipublished213 पृष्ठ
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५'—बालवग्गो श्रावस्ती ( जेतवन ) दरिद्र सेवक ६०-दीघा जागरतो रत्ति दीघं सन्तस्स योजनं । दीघो बालानं संसारो सद्धम्मं अविजानतं ॥ १॥ ( दीर्घा जाग्रतो रात्रिः दीर्घं श्रान्तस्य योजनम् । दीर्घो बालानां संसारः सद्धर्मं अविजानताम् ॥१॥ ) अनुवाद—जगतेको रात लम्बी होती है, थकेके लिये योजन लम्बा होता है, सच्चे धर्मको न जाननेवाले मूढोंके लिये संसार ( = आवागमन ) लम्बा है। राजगृह सार्द्धविहारी (=शिष्य ) ६१-चरञ्चे नाधिगच्छेय्य सेय्यं सदिसमत्तनो । एकचरियं दळ्हं कयिरा नत्थि बाले सहायता ॥२॥ ( चरन् चेत् नाधिगच्छेत् श्रेयांसं सदृशं आत्मनः । एकचर्यां दृढं कुर्यात् नास्ति बाले सहायता ॥२॥ ) २८ ]