धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४ ] धम्मपद [ ७।६ अनुवाद—जिसके आस्रव (=मल) क्षीण हो गये, जो आहारमें पर- तंत्र नहीं, जो शून्यता रूप० । श्रावस्ती (पूर्वाराम) महाकच्चायन ६४-यस्सिन्द्रियाणि समथं गतानि, अस्सा यथा सारथिना सुदन्ता । पहीनमानस्स अनासवस्स, देवापि तस्स पिहयन्ति तादिनो ॥५॥ ( यस्येन्द्रियाणि शमतां गतानि अश्वा यथा सारथिना सुदान्ताः । प्रहीणमानस्य अनास्रवस्य देवा अपि तस्य स्पृहयन्ति तादृशः ॥५॥ ) अनुवाद—सारथीद्वारा सुदान्त (=सुशिक्षित ) अश्वोंकी भाँति जिसकी इन्द्रियाँ शान्त हैं, जिसका अभिमान नष्ट हो गया, ( और ) जो आस्रवरहित है, ऐसे उस ( पुरुष ) की देवता भी स्पृहा करते हैं । जेतवन सारिपुत्त (थेर) ६५-पठवीसमो नो विरुज्झति इन्दखीलूपमो तादि सुव्वतो । रहदो 'व अपेतकद्दमो संसारा न भवन्ति तादिनो ॥६॥