धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
पृष्ठ 90, कुल 213 में से
संदर्भ में पढ़ें१३८ ] लोकवग्गो [ ७९ अनुवाद—आओ, विचित्र राजपथके समान इस लोकको देखो, जिसमें मूढ़ आसक्त होते हैं, ज्ञानी जन आसक्त नहीं होते। जेतवन सम्मुञ्जानि (थेर) १७२-यो च पुब्बे पमज्जित्वा पच्छा सो नप्पमज्जति । सो'मं लोकं पभासेति अब्भा मुत्तो'व चन्दिमा ॥६॥ ( यश्च पूर्वं प्रमाद्य पश्चात् स न प्रमाद्यति । स इमं लोकं प्रभासयत्येभ्रान्मुक्त इव चन्द्रमा ॥ ६ ॥ ) अनुवाद—जो पहिले भूल कर फिर भूल नहीं करता, वह मेघसे उन्मुक्त चन्द्रमाकी भाँति इस लोकको प्रकाशित करता है। जेतवन अङ्गुलिमाल (थेर) १७३-यस्स पापं कतं कम्मं कुसलेन पिथिय्यति । सो'मं लोकं पभासेति अब्भा मुत्तो'व चन्दिमा ॥७॥ ( यस्य पापं कृतं कर्म कुशलेन पिधीयते । स इमं लोकं प्रभासयत्यभ्रान्मुक्त इव चन्द्रमा ॥ ७ ॥ ) अनुवाद—जो अपने किये पाप कर्मोंको पुण्यसे ढाक देता है, वह मेघसे उन्मुक्त० । आलवी रंगरेजकी कन्या १७४-अन्धभूतो अयं लोको तनुकेय विपस्सति । सकुन्तो जालमुत्तो'व अप्पो सग्गाय गच्छति ॥८॥ (अन्धभूतोऽयं लोकः, तनुकोऽत्र विपश्यति । शकुन्तो जालमुक्त इवाल्पः स्वर्गाय गच्छति ॥ ८ ॥ )