धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८० ] धम्मपदं [ १३।११ अनुवाद—यह लोक अन्धे जैसा है, यहाँ देखनेवाले थोड़े ही हैं; जालमे मुक्त पक्षीकी भाँति विरले ही स्वर्गको जाते हैं। जेतवन तीस भिक्षु १७५-हंसादिच्चपथे यन्ति आकासे यन्ति इद्धिया । नीयन्ति धीरा लोकमहा नेत्वा मारं सवाहिणिं ॥६॥ (हंसा आदित्यपथे यन्ति, आकाशे यन्ति ऋद्धिया। नीयन्ते धीरा लोकात् जित्वा मारं सबाहिनीकम् ॥ ९ ॥ ) अनुवाद—हंस सूर्यपथ (=आकाश)में जाते हैं, (योगी) ऋद्धि(-बल)- से आकाशमें जाते हैं, धीर (पुरुष) सेना-सहित मारको पराजित कर लोकमे (निर्वाणको) ले जाये जाते हैं। जेतवन चिंचा (माणविका) १७६-एकं धम्मं अतीतस्स मुसावादिरस जन्तुनो । वितिएणपरलोकस्स नत्थि पापं अकारियं ॥१०॥ (एकं धर्ममतीतस्य मृषावादिनो जन्तोः। वितीर्णपरलोकस्य नास्ति पापमकार्यम् ॥ १०॥) अनुवाद—जो धर्मको अतिक्रमण कर चुका, जो प्राणी मृषावादी है, जो परलोक(का ख्याल) छोड़ चुका है, उसके लिये कोई पाप अकरणीय नहीं। जेतवन (अयुक्त दान) १७७-न [वे] कदरिया देवलोकं वजन्ति बाला ह वे न प्पसंसन्ति दानं ।