धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)
Dhanurveda Samhita of Maharshi Vasishtha with Commentary
महर्षि वसिष्ठ (टीकाकार: स्वामी हरिदयालु जी महाराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें' or 'श्लीं'? It's 'श्लीं'. 'पशुं हुंफट्'.)
Line 5: अमुक शत्रूको (हुंफट्) ऐसा दो लाख मंत्र जपकर पीछे पाशुपतास्त्र फेंके (Note: 'शत्रूको' with 'ू'.)
Line 6: फिर संहार के लिये (व्यस्त) उलटा जपे, यह पाशुपतास्त्र सब शत्रुओं
Line 7: का निवारण करने वाला है॥९४-९६॥
Line 8: वच्मि वायव्यमस्त्रं ते येन नश्यन्ति शत्रवः ।
Line 9: ॐवायव्यया वायव्यान्थोर्वा यया वा तथा । Wait, let's look at 'वायव्यान्थोर्वा' vs 'वायव्यान्त्योर्वा' vs 'वायव्यान्योर्वा': Look at the character: 'वा' 'य' 'व्या' Then: 'न्' (half na), then 'थ' with 'ो' and 'र्' on next letter? Wait, look at the letter: It has a loop at top left, curving down and up to the right stem: that is a 'थ'! Wait, does it have a 'य'? Look at 'र्थ्यां' in 'पुरश्चर्यां' (L22): 'श्च' has loop, 'र्यां' has 'र्'. Look at 'न्थो': 'न्