भारतकोश
धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

Dhanurveda Samhita of Maharshi Vasishtha with Commentary

महर्षि वसिष्ठ (टीकाकार: स्वामी हरिदयालु जी महाराज) द्वारा

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५८ धनुर्वेदसंहिता अस् भुवि | रुधिरावरणे | शीङ् स्वप्ने एधि | रुन्धि | शेष्व स्तम् | रुन्धम् | शयाथाम् स्त | रुन्ध | शेध्वम् अज् गतौ क्षेपणेच | व्रज गतौ | क्रमु पादविक्षेपे अज | व्रज | क्राम्य अजतम् | व्रजतम् | क्राम्यतम् अजत | व्रजत | क्राम्यत दह् भस्मीकरणे | मिह सेचने | णीञ् प्रापणे दह | मेह | नय दहतम् | मेहतम् | नयतम् दहत | मेहत | नयत गै शब्दे | जि जये | कृष् विलेखने गाय | जय | कृष गायतम् | जयतम् | कृषतम् गायत | जयत | कृषत मुच्ऌ मोक्षणे | सिंच सिंचने | कृन्त कर्तने मुञ्च | सिञ्च | कृन्त मुञ्चतम् | सिञ्चतम् | कृन्ततम् मुञ्चत | सिञ्चत | कृन्तत क्षिप प्रेरणे | कॄ विकिरणे | मिल मिलने क्षिप | किर | मिल क्षिपतम् | किरतम् | मिलतम् क्षिपत | किरत | मिलत