भारतकोश
धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

Dhanurveda Samhita of Maharshi Vasishtha with Commentary

महर्षि वसिष्ठ (टीकाकार: स्वामी हरिदयालु जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished76 पृष्ठ

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हिन्दीटीकासमेता ५७ ष्ठा गतिनिवृत्तौ | श्रु श्रवणे | दृशिर् प्रेक्षणे तिष्ठ | शृणु | पश्य तिष्ठतम् | शृणुतम् | पश्यतम् तिष्ठत् | शृणुत | पश्यत दा दाने | ग्रह उपादाने | पृच्छ ज्ञीप्सायाम् देहि | गृहाण | पृच्छ दत्तम् | गृह्णीतम् | पृच्छतम् दत्त | गृह्णीत | पृच्छत ब्रूञ् व्यक्तायांवाचि | भक्ष भक्षणे | पा पाने ब्रूहि | भक्षय | पिव ब्रूतम् | भक्षयतम् | पिवतम् ब्रूत | भक्षयत | पिवत इषु इच्छायाम् | ज्ञा अवबोधने | आप्लृ व्याप्तौ इच्छ | जानीहि | आप्नुहि इच्छतम् | जानीतम् | आप्नुतम् इच्छत | जानीत | आप्नुत कुथि हिंसायाम् | त्यज त्यागे | हन् हिंसागत्योः कुंथ | त्यज | जहि कुन्थतम् | त्यजतम् | हतम् कुन्थत | त्यजत | हत शासु अनुशिष्टौ | इण् गतौ | विद ज्ञाने शाधि | इहि | विद्धि शिष्टम् | इतम् | वित्तम् शिष्ट | इत | वित्त

धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक) · पृष्ठ 63, कुल 76 में से · BharatKosha