भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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परिशिष्ट छठा अंकुरना- अंकुर आना, अंकुआ फूटना. अकर्ता- कर्मसे अलिप्त, कर्म-मुक्त, कर्तव्य रहित, करनेसे अलिप्त. अकर्म- निषिद्ध कर्म, कर्म समाप्तिकी अवस्था, करके भी न करनेकी सी स्थिति. अकल्पनाख्य कल्पतरु- कल्पना रहित ऐसी जिसकी प्रसिद्धि है ऐसे परमात्म प्राप्ति करानेवाला कल्पवृक्ष. अक्रिय- क्रिया रहित. अक्रोध- क्रोधका उपशमन, क्रोधका उदय न होने देना, क्रोधावेगको पचाना. अखंड- खंड रहित, निरंतर, दीर्घकालतक, सदैव, सतत, नित्य. अगाध- गहन, गहरा, कठिनाईसे प्राप्त होनेवाला, न समझनेवाला. अग्निस्यान-योगशास्त्रमें कहा हुवा द्विदल चक्र जो भ्रुकुटिमध्यमें रहता है. अग्र- नोक, आलंबन, अवधान, एकाग्र, नासिकाग्र आदि. अग्रहार- ब्राह्मणोंको दी हुई भूमि, केवल ब्राह्मणोंका गांव. अचक्षु- जिसकी आंखें नहीं. अचरण- जिसके पैर नहीं. अच्युत- अपने स्थानसे न गिरनेवाला, जहांसे चलन नहीं, जिसमें कच्चापन नहीं, निश्चल. अंजनांचल-काजलका पर्वत. अजत्व- जन्मरहितता, अजन्मत्व, स्वयंभू स्थिति. अडगोडा- बदमाश जानवरोंके गलेमें बांधा जानेवाला अडंगा. अड्लंग- टेढामेडा, विचित्र, ऊंचानीचा, दुर्गम. अंतरंग- अंतर्मुख, आत्मीय, गुह्य, अंतःकरण. अंतर्यामी- ईश्वर, हृदयस्थ, अंतःकरणपर अधिकार रखनेवाला. अंतवंत- नाशवान, जिसका नाश होता है वह. अतिकृतकंदर्पसर्पदपं- कंदर्परूपी सर्पका दर्प तोडनेवाला. अतीत-अतिक्रमण किया हुआ, उस पार पहुंचा हुवा, जिसका स्पर्श न हो सकता हो ऐसा, पार करके गया हुआ. अतींद्रिय- इंद्रियोंसे अगम्य, इंद्रियोंसे जिसका अनुभव नहीं होता हो वह. अद्रोह- किसीका द्रोह न करना, प्राणि-मात्रोंसे अविरोधी जीवन, स्पर्धा रहित जीवन. अद्वय- दूसरे संबंधरहित. अद्वयकमलिनी विकास- अद्वैतस्थितिरूपी कमलका विकास. अद्वयबोधपुर- जहां अद्वयबोध होता हो वह स्थान. अद्वयानुभव- एकत्वका अनुभव. अद्वितीय-निरुपम, अनुपम, अकेला, एकमात्र, बेजोड, वैसा दूसरा कोई न हो. अधिदैवत- अधिष्ठात्री देवता, अभिमानी, भोक्ता पुरुष, साहंकार जीवतत्व. अधिभूत- साकारभूत सृष्टि, पंचतत्वसे बनने बिघडनेवाला सब, विनाशी जगत्. अधियज्ञ- यज्ञाधिष्ठाता, शरीर भाव रहित आत्मा, स्थूल और सूक्ष्म यज्ञोंसे परिशुद्ध निरहंकारी पुरुष. अधिष्ठान- आश्रयरूप भूमि, आश्रयस्थान, विशिष्ट अर्थ शरीर. अधिष्ठि- अधिष्ठात्री अधेय- न ध्यान करने योग्य. अध्यात्म- आत्मनिष्ठ निरहंकारवृत्ति, आत्म संबंधी, आत्माकी सहजस्थिति, सहज नित्यत्व. अध्वर- यज्ञ.