भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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पृष्ठ 1146

यहाँ पृष्ठ का देवनागरी लिप्यंतरण प्रस्तुत है:

[बायाँ स्तम्भ]

अनन्त- देशकालपरिच्छेदशून्य, अपरि- च्छिन्न, जिसका अंत न हो ऐसा, अनन्य- एकनिष्ठ, एकरूप, ईश्वरसे भिन्न अन्य कुछ भी न जाननेवाला, अनन्यचित्त, अनन्यभक्त अनन्यभाव आदि ऐसे शब्द आये हैं. अनर्गल- व्यर्थ, अंडबंड, लगातार, अप्रतिहत. अनवच्छिन्न- अखंड, अविच्छिन्न, अटूट, अनवरत- अखंड, सतत. अनवसर- कुसमय, अकाल, जब न होना चाहिए तब. अनाक्रोश- आक्रोशरहित, बिना कटूक्तिके, सहज. अनात्म- अचैतन्य, जड, असत् पदार्थ. अनाम- जिसका कोई नाम न हो, अनावरण- जिसपर कोई आवरण न हो, खुला. अनावृत्त- प्रकट, निरावृत्त, खुला. अनासक्त- असंग, कहीं न उलझाहुवा निर्लिप्त, न चिपका हुवा. अनिल- वायु. अनिष्ट- अमंगल, अकल्याणकारक, अशुभ. अनुकार- प्रतिबिंब, अनुकरण. अनुपम- उपमारहित, सर्वश्रेष्ठ, अत्युत्तम. अनुभव, अनुभूति- प्रत्यक्षदर्शन. अनुभवी, अनुभावी- प्रत्यक्ष दर्शन किया हुवा, साक्षात्कारी, मंझाहुवा, अभ्यस्त. अनुमान- कयास बांधना, अटकल लगाना, समझना. अनुरक्ति- प्रीति, प्रेम. अनुष्ठान- कार्यारंभ, विधिवत् आचरण, शास्त्र-विहित कार्य, आराधना. अनुसंधान- योग, तादात्म्य, तन्मयताके साथ किसीके पीछे लगना, खोज. अनुज्ञाता- अनुमोदनकर्ता, आज्ञा देनेवाला.


[दायाँ स्तम्भ]

अन्यथाज्ञान - विपरीत ज्ञान, उलटा समझना. अपरिग्रह- व्यर्थ के अथवा अनावश्यक वस्तुओंका संग्रह नहीं करना. अपेक्षा- आशा, अभिलाषा, चाह, इच्छा. अप्रमेय- अगम्य, प्रमाणोंसे जिसकी सिद्धि नहीं होती हो ऐसा. अंभ- पानी. अभय- नहीं डरना, निर्भय, अभिचार- जारण मारण, जादू टोना, टोटका. अभिलषित- इच्छित, फलाकांक्षी. अभिभूत- व्याप्त, वशीभूत, पराभूत, विकल. अभिव्यक्त-- प्रकाश किया हुवा, प्रकट. अभीष्ट- इच्छित. अभेदांतःकरण- एकत्वानुभूत अंतःकरण, समरसांतःकरण, हृदयसे एकत्वा- नुभव. अभोक्ता- जो भोग न करता हो. अभ्यास- मनोनिग्रहपूर्वक सतत अभ्यास, भली या अच्छी बातोंकी ओर विचार पूर्वक मनको लगाना, योग साधन, ईश्वरमें मन बुद्धि भावके अर्पणका सतत प्रयास, असद्- वृत्तिका त्याग तथा सद्वृत्तिके स्वीकारमें विचारपूर्वक तत्परता, अध्ययन. अमनस्क- मनरहित, उदासीन, तटस्थभाव इच्छा रहित. अमर्ष- क्रोध. अर्घ्य- ईश्वरको, अथवा पूज्य व्यक्तिको गंध पुष्पादि डाल कर हाथ पर दिया जानेवाला पानी. अर्चन- पूजा, आदर सत्कार. अर्चिरार्माग- देवयान, प्रकाशमय मार्ग ज्योतिर्मय मार्ग. अर्धोन्मीलन- आधी खुली, आधा खुला. अलकलट- बालोंकी लटें, बालोंका गुच्छ.


[पाद-टिप्पणी / पृष्ठ संख्या]

ज्ञानेश्वरी २००