भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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कर्म- बिना किये भी जो व्यापार होता रहता है, चलता रहता है ! कर्मनिष्ठ- कर्ममें श्रद्धा रखनेवाला. कर्मफल- कर्मके बाह्य फल. कर्मबंध- कर्मरूपी बंधन. कर्मबीज- कर्मकी प्रेरणा. कर्मविरत- कर्मसे विमुख. कर्मानुगत- कर्मानुसार. कलंदर- मदारी. कलितकाल कौतूहल- कालके चमत्कार को जिसने अपने अंकित रखा है ऐसा. कलुषकरिकेलरी- पापहस्तिरूपी हाथियोंका संहार करनेवाला सिंह. कल्पना- इंद्रियोंके संमुख अनुपस्थित वस्तुओंके रूप गुणादिको अनुभूत करानेकी अंतःकरणकी शक्ति. मनगढंत बात. कल्याण- श्रेय, हित, शुभ. काकीमुद्रा- कौवेकी चोंचसा मुख बनाकर मुखसे अंदर सांस लेनेकी क्रिया इससे साधक निरोगी बनता है. काम- संगजन्य मूलभूत विकार. विषय सुंदर लगना. विषयोंमें माधुर्यका अनुभव. विषयेच्छा, संतान कामना ऐहिक सुखाशा. भोगाकांक्षा. कामना- भोगोंकी इच्छा. काम्यकर्म- फलभोगेच्छासे किये जानेवाले कर्म. कायी-काई- जल पर अथवा शिलापर आनेवाला घासका जाला. कारस्थान- षड्यंत्र. कालकूटकल्लोलतरंग- कालकूट विषके हिलोरोंके तरंग. कालाग्निरुद्रगूढ- प्रलयकालके भयानक अग्निका सा गूढ. किरात- प्राचीन कालकी एक वन्य जाति जो क्रूर होती थी

किलनी- पशुओंके देहमें चिपकनेवाला एक कीट. संभवतः वह स्वेदज है. कुंतलालकमस्तक- जिसके सिरपर घुंगराले बाल हैं. कुमुदिनी चंद्रविकासी कमल. कुल्लापडगा- पीकदान, थूकनेका बरतन. कुश- दर्भ, घास. कुहर- गुफा. कुहराम- रोना, पीटना, क्रंदन आर्तक. कूं़चा- झाडू.-देवघरमें सफ़ाई करनेवाला. कृतांत- यम, काल, अंत लानेवाला. कृतार्थ- कृतकृत्य. सफल मनोरथ. केलिप्रिय- क्रीडाप्रिय. कैवल्यधाम- मुक्तिमंदिर. कोंचना- चुभाना, गडाना, गोदना. कोंदण- जडाव, पच्छी, मूंडा. कोपल-कोंभ, कोंभ- अंकुर कल्ला. कोपट- छोटी झोपडी. कोशकीटक- घर बनाकर अपनेको बाहर जानेका रास्ता न रखनेवाला कीडा जो अपनेलिये घर बनाकर उसी घरमें मरता है ! कोऽहं- मैं कौन हूँ इसकी जिज्ञासा. कौतुक- आश्चर्य, विनोद, कुतूहल, सराहना. कौतूहल- कुतूहल. क्रमयोगी- क्रमानुसार ब्रह्मप्राप्त करनेवाला योगी. क्रोधावर्त- क्रोधका भंवर. ख खत्ती- अनाज सुरक्षित रखनेका स्थान. खद्योत- जुगनु. खर- गधा. खुगीर- नमदा, जीन. खेचर- आकाशगामी वायु. खोडरूप- शहतीर, अडगोडा, आधार.

ज्ञानेश्वरी ३०४