ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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१० विभूति-चिंतनयोग श्री गुरु निवृत्तिनाथका आध्यात्मिक स्वरूप विश्वबोधविदग्ध । विद्यारविंद-प्रबोध । पराप्रमेय-प्रमद- । विलासिया नमो ॥ १ ॥ संसारतमका तू सूर्य । अप्रतिम परम-वीर्य । नमो तरुण-तर-तूर्य । लालनलीला ॥ २ ॥ जगदखिल-पालन । मंगलमणि-निधान । स्वजन-वन-चंदन । नमो आराध्यलिंग ॥ ३ ॥ चतुर-चित-चकोरचंद्र । आत्मानुभव-महानरेंद्र । श्रुतिगुणगण तू समुद्र । मन्मथ मन्मथ नमो ॥ ४ ॥ सुभाव-भजन-भाजन । तू भवेभ-कुंभ-भंजन । विश्व-उद्भवका भवन । नमो श्री गुरुदेव ॥ ५ ॥ श्री गुरुका सामर्थ्य— तेरा अनुग्रह श्री गणेश । देता है जो अपना स्वरस । तब सरस्वतीमें प्रवेश । होता है शिशुका ॥ ६ ॥ आश्वासन उदार देयका । जलाता दीप नव-रसका । थाह लगाता तब वाणीका । अनायास ॥ ७ ॥