ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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पड़ेगे अब कृष्णार्जुन वाक्य बीज । सात्विक भाव-युत चित्तमें सहज । खिलेगा प्रेम-प्रमेयका बाग आज । श्रोताओंके लिए ॥ ३२ ॥ अजी ! देना अब अवधान । चढना आनंद सिंहासन । देवने डाली माला श्रवण- । इंद्रियको आज ॥ ३३ ॥ विभूतियोंका अब महाज्ञान । देगा अर्जुनको सिद्ध श्रीकृष्ण । सुनिये ज्ञानदेवका कथन । जो है निवृत्तिका दास ॥ ३४ ॥ गीता श्लोक ३४ ज्ञानेश्वरी ओवी ५३४- ॐ (38)