भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशांकः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च । नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥ ३९ ॥ नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व । अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥ ४० ॥ एक तू क्या नहीं है देव । तथा कहां नहीं तू देव । जहां जैसे ही तू है देव । नमस्कार मेरा ॥ १९ ॥ वायु है तू अनंत । यम तू नियमित । भूतमात्रमें नित । बसता तू अग्नि ॥ ५२० ॥ वरुण और तू सोम । सृष्टा तथा तू है ब्रह्म । पितामहका परम । आदि जनक तू ॥ २१ ॥ और जहां जो जो कुछ है । रूप है अथवा नहीं है । नमन जहां जैसा भी है । जगन्नाथ तुझको ॥ २२ ॥ तू अग्नि तू वायु समस्त देव प्रजापते ब्रह्म-पिता सु-श्रेष्ठ । तुझे नमस्कार सहस्र बार पुनः पुनः और पुनः पुनः है ॥ ३९ ॥ आगे कि पीछे सब ओर देव सदा नमस्कार जहां जहां तू । उत्साह सामर्थ्य अनंत तेरा सभी बना तू तुझमें सभी है ॥ ४० ॥ (49) ३८५ विश्व-रूप-दर्शनयोग