ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें-की प्रशस्ति श्रीकृष्णसे १ : २२९, ४ : २८-३०, ६ : १४८-१५१ ९ : ३६-४१, १० : ५६-६१ १५ : ४४७-४५२ १५ : ५७७-५८१, १६ : २६९-२७० -संजयकी ओरसे ४ : ७-१५, ११ : १६५- १७५, ११ : ६४१-६४६, १७ : ४२७- ४३०, १८ : १४७०-१४७२ -ज्ञानेश्वरकी ओरसे ६ : १२०-१३०,८ : ८-१४,१८ : १६८६-१६८९ -की विरक्ति १० : १४५-१८४,११ : ५५५-६०८ -के विशेषण २ : ८-११, १२ : २०, १७ : ३१-३३ -मोहग्रस्त १।१७७-२०६, ११:४९-६१ से कृष्णका प्रेम १ : १४१-१४३, ५ : १६७-१७३, ६ : १४६, १० : ५३-६०, ११ : ३९-४३, १८ : २८२-२८५, १८ : १३४७-१३५१, १८ : १३६८-१३७८, १८ : १३८६-१३८३. १८ : १४१८-१४२५ अलोलुप्त्व १६ : १६३-१६७ अवतार- -का कारण ४ : ४९-५१, १० : २५२ -का कार्य ४ : ५२-५७, १० : २५३- २५४, -की पूर्वस्थिति ६ : ३२०-३२३, ११ : ८३-८५, ११ : १८०-१८१, ११ : ६१४-६१५, १३ : १०७२-१०७४, १३ : ११४०-११४१, १५ : ३१२-३१६ अवस्था- उन्मनी ६ : ३०९-३२०, १५ : ५३३-५४१, जागृती १ : २४६, १८ : ४०४-४०५, १८ : ११०४ निद्रा १८ : ३८१, १८ : ४०३,१२ : ५४०
सुषुप्ति १५ : ५२६ स्वप्न ५ : ५३-५४, ८ : ७३ असक्त बुद्धि-१३ : ५९३, १८ : ९५६-९५९ अहंकार- -का कार्य ३ : १७७-१७८, ३ : १८४- १८५, ७ : १६५-१७१ १८ : १०५१, १८ - १२७४-१२७७ -का स्वरूप १३ - ७७-८३, १३-७१४-७२७, -की उत्पति १४ : ९२, नाहंकृतिभाव ५ : ३८-६३, १८ : ४०१-४२१ निरहंकार १३ : ५२४-५३३, अहिंसा-१३ : २१७-३१०, १६ : ११४, अक्षर- प्रणव ८ : ११०-११८, ब्रह्म ८ : १५-१७, लक्षण ८ : १००-१०३, ८ : १८०-१८३, . अज्ञान-४ : ६८-७०, १४ : १२९-३३, -का कार्य १५ : १३८, १५ : ३४२, १६ : ४३-५१, १८ : ३२६, १८ : ४६०, १८ : ५४१, -का त्याग ५ : ८३; १८ : १३९०-१३९५, -का स्वरूप १४ : ७०-७९, १६ : २४६-५१, -के लक्षण १३ : ६५६-८५१, -परमात्म विषयक ५ : ८२, ९ : १५५-१७० आचार्योपासना-गुरुसेवा- आचार्य-वर्णन, १३ : ३७१-४५३, १४ : १ गुरुका प्रेम १३ : ४५५-४५७, १५ : १९-२६ गुरुका भजन ४ : १६५-१६७, १८ : १५६२-१५७५
ज्ञानेश्वरी ३८.