भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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ज्ञानेश्वरीके विशेष अध्ययनके लिये विषय - विश्लेषण ❖❖❖❖❖ ज्ञानेश्वरीकी एक विषयसूचि पहले दी है। वह सामान्य विषयसूचि है। विशेष अध्येताओंके लिये दूसरी एक विषय सूचि यहां दी जाती है। इससे ज्ञानेश्वरीमें कौन कौन विषय किस अध्यायके किन ओवियोंमें आये हैं इसका पता चलेगा। इसमें १४० के करीब मुख्य विषय चुनकर फिर उनके उपविभाग किये गये हैं। विषयके जो अंक हैं वे काले-बोल्ड-टाइपमें अध्यायके और सादे-पायका-टाइपमें ओवियोंके हैं। जैसे 'अक्रोध' १६ : १२५-१२९ ओवी संख्या । ॐ \t अनिंदा १६ : १४१-१५२ नमन- १ : १, २-२० \t अभ्यासयोग- नामका उपयोग- १७ : १५७-१६७ \t -का सामर्थ्य ८ : ८१-८५, १२:१११-११३ ब्रह्मका नाम- ८ : ११८, १७ : ३४३ \t -का स्वरूप ६ : ४१९-४२६, १२:९७-११० अक्रोध- १६ : १२५-१२९ \t अमानित्व १३ : १८४-२०० १६ : २०५ अचापल्य- १६ : १८३-१८५ \t अमृत- अद्रोह- १६ : १९९-२०३ \t -का दुर्लभत्व २ : २४० अधिभूत- ८ : ३०-३२ \t -का परिणाम १ : ७७ 'अध्यात्म- \t -की उत्पत्ति १८ : १४७६-१४७७ -की महत्ता ११ : ४४-४७ \t परमामृत २ : ६७, १० : १९४-१९८ -की परिभाषा ८ : १८-१९ \t प्राकृत १० : २२०-२२५ -ज्ञाननित्यत्व १६ : ६१५-६२० \t अर्चिरामार्ग- -विद्या १० : २६६ \t -का स्वरूप और फल ८ : २२०-२२५ अध्यायसंबंध- \t अर्जुन- पहला और दूसरा १ : २७४-२७५ \t -का कृष्णसे सख्य १ : ५३७-५५४ दूसरा और तीसरा २ : ३७१-३७३ \t -का कृष्णसे समरसैक्य १०:२९३-२९४, तीसरा और चौथा ३ : २७४ \t १३ : ११४५ १५ : ४५५, १५ : ४५८, पांचवां और छटा ५ : १७७-१७८ \t १८ : १३४८ सातवां और आठवां ७ : १६९-२०५ \t -का निर्मोह, ११ : ४९-६८, १८ : नौंवां और दसवां १० : ४९ \t १५५८-१५६६ दसवां और ग्यारहवां १० : ३३०-३३५ \t -का पूछनेका चातुर्य ७ : २०३-२०४ ग्यारहवां और बारहवां ११ : ७०२-७०६ \t -का शौर्य १:२०१, २ : ८-११, ११ : तेरहवां और चौदहवां १४ : ३३-३८ \t ३८७, १८ : १२९५-१२९६ पंद्रहवां और सोलहवां १६ : ४९-६३ \t -की अनन्यभक्ति २ : ५८-६०, ३ : २१- सत्रहवां और अठारहवां १८ : ६०-७४ \t २९, ९ : २६३-२६२ १० : १८३-१८४ अध्यायसंगति १० : २४-२९, १८ : १४५५ १४५५ ३७ \t विषय-विश्लेषण