ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ : १४०९-१४१५, —का सगुण रूपवर्णन ११ : ६००-६०८ —का वर्णन १८ : १२९९-१३०४ —का स्तवन अर्जुनसे १० : १४४-१८४, ११ : ९८-१०९, —की अगम्यता ५ : १७४, १० : ६४-७१ —की व्यापकता १० : २१५-३०७ —के गुण २ : २९०, ३ : २८, ६ : ३७-३८ १२ : २३९-२४४, १७ : ४२३ —के विशेषण ९ : २७८-२९५ —प्राप्तिकी साधना ९ : ४३०, ९ : ४६५-४६६, ९ : ४७०-४७१, ९ : ५१६, १० : ७२-७३, ११ : ६८५-६८८, ११ : ६९६-६९८ १२ : ३५-३८, १२ : ४०-८१, १२ : ९८-१४०, १८ : ९१४-९२२, —शरणागति १८ : १३१९, १८ : १३९८-१४०० —साक्षीभूत ९ : १२९ —स्वरूपकी व्यापकता ७ : ३३-३९, ७ : १५९-१६४, ९ : २६५-३०२, १० : ८२-११४, १० : २६३-२६४, १० : ३१७, ११ : २७१-२७७ १४ : ३७३-३८०, १५ : ३९७-४२१, उपाधि— अक्षरपुरुष १५ : ५०२-५१९ निरुपाधिकतत्त्वके ज्ञानके लिये २ : १४८-१५०, ८ : १७९-१८१ ८ : १९४, १५ : ४६४-४७०, १५ : ५२५-५५७ एकांतसेवा ६ : १६४-१७९, १३ ; १९८-१९९, १३ : ५१८-५१९ १३ : ६१२-६१३, १८ : १०२२-१०२३, ऐश्वर्ययोग— ९ : ७१-९२, कर्ता— —का स्वरूप ३ : १७८, १८ : ३२१-३२६, —के प्रकार तामस १८ : ६६२-६८८ ” राजस १८ : ६६०-६६१ ” सात्विक १२ : ६३१-६४८ —ज्ञानी १८ : २१२-२१४ कर्म— —अपरिहार्य ३ : ५६-६३ कर्माकर्म विवंचना ४ : ८५-९८ काम्य— १८ : ९८-१०५ —का कारण और हेतु १८ : ३१५-३७६ का फल ३ : १५१, १८ : १२२-१२३, १८ : १३९, १८ : १५८-१६३, —का फलत्याग १८ : १२४-१२६, १८ : २५७-२६७, —का फलत्याग न करनेवाला ७ : १५१-१५८ —का योग-रूप साधन ६ : ५४-६०, —की प्रचोदना १८ : ४६१-४७७, —की व्याख्या ४ : ८९, ८ : २७-२९, १८ : ५०७-५१४, —कुशलता १७ : ३४६-३५२, १८ : १६४-१७७ —के विविध फल १८ : २३३-२५६, —तामस—१८ : ६११-६२६ नित्य—१८ : ११५-११७, निषिद्ध—४ : ९१ नैमित्तिक—१८ : ११०-१११ नैष्कर्म्य ४ : ९३-९८, १८ : १५४, १८ : ९७०-९८३, १८ : २२७-२३२. प्रायश्चित्त—१८ : १०१७. —फल ईश्वरार्पण १८ : २२७-२३२. फल हेतुरहित—२ : २६४-२७७, २ : २७८-२७९ ३ : ६८-७५. —बंध ३ : १८४-१८५, ८ : २०५ ज्ञानेश्वरी ५०