ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमोह- —का परिणाम २ : ३२३-३२४, १६ : ३६९-३७०. —की उत्पत्ति ७ : २६७ —से ग्रस्त २ : ७१. मोक्ष- —का इच्छुक १५ : २७७-२७९. —का स्वरूप ६ : ६८-७० —के अधिकारी ६ : ३४२, १८ : ९८८-९९१ —के उपाय ३ : ७७-८३, १४ : ५०-५९, १५ : ३२, १५ : ३५, १७ : ३२७, १८ : १०४६ —बद्ध ३ : ६४-६६. मौन १० : २९८. यज्ञ- —के प्रकार तामस १७ : १८९-१९५, द्वादश ४ : १२३-१४८, १७ : ३६०-३६४. राजस १७ : १८५-१८८. —सात्विक १७ : १७१-१८४. —स्वधर्मरूप ३ : ८६-१३०. जपयज्ञ १० : २३२-२३३ —ज्ञानयज्ञ ९ : २३९-२५९. योग- —अभ्यासस्थान ६ : १६३-१८०. —आसन ६ : १८१-१८५. —का अधिकारी ६ : ३४६. ६ : ३४५-३५६. —का अनधिकारी ६ : ६४४-६४८ का फल ६ : २९३-३१०. —के अंग ६ : ५४-६०. —के कष्ट १२ : ५१-६४. —जीवपरमात्म १२ : १५३-१५५. नाथमतका योगसंकेत ६ : २९१. —योगभ्रष्टकी स्थिति ६ : ४३०-४३७, —योगारूढ ५ : १४८-१६०. ६ : ६२-६५. श्रेष्ठतम—६ : ४७४-४८५. संन्यास कर्मैक्य योग ६ : ३९-५३. सांख्य-५ : २९-३१ —बुद्धि २ : २७३-२७५. राजहंस —९ : ४४, १२ : १२७, १३ : ११४२, १८ : १७१३. राजा ९ : ४५, १० : २३९, १८ : ७३३, १८ : ८४९, १८ : १६३३. लज्जा १३ : ५३५-५४३, १६ : १७५-१८२ लोकसंग्रह— ३ : १५२-१५९, ६ : १६८-१७८, १६ : ४६८. विकार— —की उत्पत्ति १३ : ९६६-९६७ —देहके १४ : ३१५ —क्षेत्रके १३ : ७२-१६०. विभूति—१० : २१५-३०७. विवेक— —कार्य १ : २२, ५ : ८४-८५, ९ : १९०, १४ : २०६-२०८. —का स्वरूप १८ : १६३२. विश्वरूप— —का महत्त्व ११ : ६०९-६२१. —की दुर्लभता ११ : १६५-१७५ —दिखानेका उद्देश्य ११ : ४९७-४९८. —दिव्य दृष्टिकी आवश्यकता ११ : १५४- १६३. —सगुणसे श्रेष्ठ ११ : ६२३-६३७. विषय— —का त्याग वास्तविक २ : ३३१-३३७ —का त्याग मिथ्या ३ : ६४-६६ —कर्मेंद्रियके १३ : ११९-१२०. —का भोक्ता ५ : ११०-११२, १६ : २२१-२२६, —की उत्पत्ति १४ : ९३-९४, —की स्मृति ३ : ३१७-३३० —सुख ५ : ११३-१२०, —सुखका परिणाम ३ : २०१,
ज्ञानेश्वरी ४६