ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
पृष्ठ 67, कुल 1172 में से
संदर्भ में पढ़ें३ : २१०-२१६, विज्ञान ७ : ६, १८ : ८४७, वेद- -का मूल १८ : १४२६-१४३३, -की उत्पत्ति १ : ७२, ९ : २७६-२७७ -परमात्मस्वरूप वर्णनमें असमर्थ ९ : ३७१, १० : ६४, -श्रेष्ठ ९ : ३७० वैराग्य- -का फल १८ : ९०४, -का स्वरूप ८ : ३७३-३७७, १३ : ५१२-५२३, १५ : ३६-३९, १५ : २५६-२५७, १५ : २७७ १८ : ९१८-९२१, -की आवश्यकता १५ : ३९१-४६१, १८ : १०४३-१०४७, -की कठिनाई १८ : ७८२-७८९, -शंकरका १३ : २४-२५, १८ : ७८९ शम- १८ : ८३३-८३४, शरणता- -का फल ९ : ८८, १८ : १४०९-१४१५. -के प्रकार १८ : १३१९, १८ : १३९८-१४०५, १८ : १४१६. शांति- -का साधन ४ : १८९-१९१, ५ : ७१, ९ : ४२९, १८ : १३२०. -का स्वरूप १६ : १३१-१४० १७ : ४२४-४२६, १८ : १०८५. शास्त्र- १६ : २९५-२९७, १३ : ४५५-४६७, १८ : ८८८-८९३, १८ : १४५३. शौच १३ : ४६१-४८३, १६ : १९७-१९८, १८ : ८३९-४०. शौर्य १८ : ८५६-८५७. श्रद्धा- अश्रद्धा ४ : १९३-२०६, ९ : ५७-६१. -का लक्षण ४ : १८७-१९१, १६ : ४६०, १८ : ८४९-८५०. -की व्याप्ति १७ : ६१-७७. -तामस १७ : ७९-८२. -राजस १७ : ७८ -सात्विक १७ : ७६-७७. संजय- -का आनंद १४ : ४१३-४१४, १७ : ४२४-४३०, १८ : १६१३-१६२०. -का भाग्य वर्णन १८ : १५७९-१५८३. -के अष्टसात्विक भाव ९ : ५२५-५३०, १८ : १६०२-१६०६. -पर व्यास कृपा १८ : १६०८-१६१२. सत्- -नामका उपयोग १७ : ३७९-३८५. संत २ : १२६, ३ : ६८-७४, ४ : ९३-११४, ५ : ७३-७५, ५ : १०५-१०६, ९ : १८८-१९६, १४ : ३०८-३१८, १५ : २८४-३०५, १५ : ५५९-५६९, १८ : १३५६. -का संग १५ : ४२२, १८ : १६३२ -का स्तवन ५ : १३६-१४०, १८ : १७७०-१७९१. -स्थितप्रज्ञ २ : २९१-३६७. सत्य- १६ : ११५-१२४. सत्वशुद्धि- १६ : ७४-८०, १७ : २२५-३३५. संन्यास- -आश्रम ६ : ४९-५० -का महत्व १८ : ७०-७१ -का लक्षण ५ : १९-२५ -की व्याख्या १८ : ९२ -ज्ञानप्रधान १८ : २५७-२६७, १८ : १२६०-१२६५ संपत्ति- आसुरी-१६ : २१७-२६३. आसुरी मनुष्यकी-९ : १७२-१८३, १६ : २८१-३०४, आसुरी मनुष्यकी गति ९ : १८४-१८५, १६ : ४०५-४२२, आसुरी सं. का परिणाम १६ : २६२, दैवी-९ : १८८-१९४, -का महत्त्व १६ : २०७-२१२, का स्वरूप १६ : ५९, १६ : ६५-६७, -की परिभाषा १६ : ६६ समचित्तत्व-२ : २६७-२८४, १२ : १९७-२०४ ४७ विषय-विश्लेषण