भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 944, कुल 1172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 944

संत एकनाथ महाराज— कैवल्यका है पूतला । प्रकट हुवा है भूतला । चैतन्यकी जो चित्कला । ज्ञानदेव मेरा ॥ साधकके हैं मायबाप । दर्शनसे हरता पाप । सब भूतोंमें सुखरूप । ज्ञानदेव मेरा ॥ ज्ञानियोंका जो मुकुटमणि । चिंतनशीलौंका चिंतामणि । पूज्य स्थानमें जो महान ज्ञानी । ज्ञानदेव मेरा ॥ चलाकर दिखायी जड़ भित्ति । हरण की चांगदेवकी भ्रांति । मोक्ष-मार्गका है महान साथी । ज्ञानदेव मेरा ॥ भैसेके मुखसे वेद कहलाया । ब्रह्म वृंदका अभिमान मिटाया । शांतिका पुतला बन व्यक्त भया । ज्ञानदेव मेरा ॥ परब्रह्म साम्राज्यकी है दीपिका । कही तूने गीताकी भावार्थ दीपिका । पंढरीके विठ्ठलका तू प्राणसखा । ज्ञानदेव मेरा ॥ गुरुसेवाके लिये जान । शरण एका जनार्दन । त्रिभुवनका जीवन । ज्ञानदेव मेरा ॥ 'ज्ञानेश्वरी ८७२