भारतकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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तैसा वह धनुर्धर । दुःखावेगसे जर्जर । रथको था जो सुंदर । दिया छोड ॥ ७२ ॥ तथा छोड तीर कमान । करते अश्रुपात नयन । राजन् सुनो यह कथन । बोला संजय ॥ ७३ ॥ दूसरे अध्यायकी प्रस्तावना — इस पर वैकुंठ नाथ । देखके खेद-मूर्ती पार्थ । किस भांतिका परमार्थ । कहेगा भला ॥ ७४ ॥ सविस्तर करेगा वर्णन । सकौतुक कहेगा कथन । कहेगा ज्ञानदेव वचन । निवृत्तिदास ॥ ७५ ॥ गीता श्लोक ४७ ज्ञानेश्वरी ओवी २४७. ॐ