दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)
Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
पृष्ठ 12, कुल 196 में से
संदर्भ में पढ़ें[ १० ] विषय पृष्ठ-संख्या १६५—क्षमाका महत्त्व १४३ १६६—क्रोधकी अपेक्षा प्रेमके द्वारा वशमें करना ही जीत है १४३ १६७—वीतराग पुरुषोंकी शरण ही जगत्के जंजालसे बचनेका उपाय है १४६ १६८—शूरवीर करनी करते हैं, कहते नहीं १४६ १६९—अभिमानके वचन कहना अच्छा नहीं १४७ १७०—दीनोंकी रक्षा करने- वाला सदा विजयी होता है १४७ १७१—नीतिका पालन करने- वालेके सभी सहायक बन जाते हैं १४७ १७२—सराहने योग्य कौन है ? १४८ १७३—अवसरपर चूक जानेसे बड़ी हानि होती है १४८ १७४—समयका महत्त्व १४६ १७५—विपत्तिकालके मित्र कौन हैं ? १४६ १७६—होनहारकी प्रबलता १५० १७७—परमार्थप्राप्तिके चार उपाय १५१ विषय पृष्ठ-संख्या १७८—विवेककी आवश्यकता १५१ १७९—विश्वासकी महिमा १५१ १८०—बारह नक्षत्र व्यापारके लिये अच्छे हैं १५२ १८१—चौदह नक्षत्रोंमें हाथसे गया हुआ धन वापस नहीं मिलता १५३ १८२—कौन-सी तिथियाँ कब हानिकारक होती हैं १५३ १८३—कौन-सा चन्द्रमा घातक समझना चाहिये ? १५४ १८४—किन-किन वस्तुओंका दर्शन शुभ है ? १५४ १८५—सात वस्तुएँ सदा मङ्गलकारी हैं १५४ १८६—श्रीरघुनाथजीका स्मरण सारे मङ्गलोंकी जड़ है १५४ १८७—यात्राके समयका शुभ स्मरण १५५ १८८—वेदकी अपार महिमा १५५ १८९—धर्मका परित्याग किसी भी हालतमें नहीं करना चाहिये १५६ १९०—दूसरेका हित ही करना चाहिये, अहित नहीं १५६ १९१—प्रत्येक कार्यकी सिद्धिमें तीन सहायक होते हैं १५६