दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)
Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १२ ] विषय पृष्ठ-संख्या | विषय पृष्ठ-संख्या २१९—त्रिभुवनके दीप कौन हैं? १७८ | २२९—जीवन किनका सफल है १८२ २२०—कीर्ति करतूतिसे ही | २३०—पिताकी आज्ञाका पालन होती है १७८ | सुखका मूल है १८२ २२१—बड़ोंका आश्रय भी | २३१—स्त्रीके लिये पति-सेवा मनुष्यको बड़ा बना | ही कल्याणदायिनी है १८३ देता है १७८ | २३२—शरणागतका त्याग पाप- २२२—कपटी दानीकी दुर्गति १७९ | का मूल है १८४ २२३—अपने लोगोंके छोड़ | २३३—कलियुगका वर्णन १८४ देनेपर सभी वैरी हो | २३४—और चाहे जो भी घट जाते हैं १७९ | जाय, भगवान्में प्रेम २२४—साधनसे मनुष्य ऊपर | नहीं घटना चाहिये १८६ उठता है और साधन | २३५—कुसमयका प्रभाव १८८ बिना गिर जाता है १८० | २३६—श्रीरामजीके गुणोंकी २२५—सज्जनको दुष्टोंका सङ्ग | महिमा १८९ भी मङ्गलदायक होता है १८० | २३७—कलियुगमें दो ही २२६—कलियुगमें कुटिलताकी | आधार हैं १९० वृद्धि १८१ | २३८—भगवत्प्रेम ही सब २२७—आपसमें मेल रखना | मङ्गलोंकी खान है १९० उत्तम है १८१ | २३९—दोहावलीके दोहोंकी २२८—सब समय समतामें | महिमा १९१ स्थित रहनेवाले पुरुष | २४०—रामकी दीनबन्धुता १९२ ही श्रेष्ठ हैं १८१ |