भारतकोश
दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)

Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 196 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 196

१६२ दोहावली भावार्थ—क्या भाषा, क्या संस्कृत, [श्रीभगवान्‌के गुण गानेके लिये तो] सच्चा प्रेम चाहिये। जहाँ कम्बलहीसे काम चल जाता हो, वहाँ बढ़िया दुशाल लेकर क्या करना है? ॥५७२॥ रामकी दीनबन्धुता मनि मानिक महँगे किये सहँगे तृन जल नाज। तुलसी एते जानिये राम गरीब नेवाज ॥५७३॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि बस, इतना जान रखना चाहिये कि श्रीरामचन्द्रजी 'गरीबनिवाज'—दीनबन्धु हैं। इसीसे उन्होंने मणि-माणिक्य आदि (जिनके बिना आनन्दसे हमारा काम चल सकता है) महँगे किये हैं और तृण, जल तथा अन्न (जिनके बिना पशु-पक्षी और मनुष्यादि प्राणियोंका काम ही नहीं चल सकता) आदि वस्तुओंको सस्ता कर दिया है ॥५७३॥