दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Drig Drishya Viveka Hindi
स्वामी भारतीतीर्थ / आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Drig-Drishya Viveka with Sanskrit Shlokas and Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished34 पृष्ठ
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दृग्दृश्य विवेक | Drig Drishya Vivek
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अहंकारलये सुप्तौ
भवेद् देहोऽप्यचेतनः।
अहंकारविकासार्धः
स्वप्नः सर्वस्तु जागरः।।
अहंकार जब पूर्ण लय को प्राप्त होता है, उस समय देह की अचेतनता से लक्षित सुषुप्ति अवस्था प्राप्त होती है। अहंकार के अर्धविकास में स्वप्नावस्था तथा अहंकार के पूर्णविकास से जाग्रत अवस्था प्राप्त होती है।
In the state of deep sleep, when ego disappears the body also becomes unconscious. The state in which there is the half manifestation of the ego is called the dream state, and the full manifestation of the ego is the state of waking.
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