भारतकोश
दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Drig Drishya Viveka Hindi

स्वामी भारतीतीर्थ / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Drig-Drishya Viveka with Sanskrit Shlokas and Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished34 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 34 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 16

दृग्दृश्य विवेक | Drig Drishya Vivek


१४

सृष्टिर्नाम ब्रह्मरूपे
सच्चिदानन्दवस्तुनि ।
अब्धौ फेनादिवत् सर्व
नामरूपप्रसारणा ।।

जैसे एक सागर में अनेक फेन–बुद्बुदें आदि रूप उत्पन्न होते है, वैसे ही एक सत् चित् आनन्द स्वरूप ब्रह्म में अनेक नाम और रूपों के प्रसारण हो जाने को सृष्टि कहते है।

The manifesting of all names and forms in the entity which is Existence – Consciousness – Bliss and which is the same as Brahman, like the foams etc. in the ocean, is known as creation.


14