भारतकोश
दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Drig Drishya Viveka Hindi

स्वामी भारतीतीर्थ / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Drig-Drishya Viveka with Sanskrit Shlokas and Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished34 पृष्ठ

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दृग्दृश्य विवेक Drig Drishya Vivek

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शक्तिद्वयं हि मायाया
विक्षेपावृत्तिरूपकम् ।
विक्षेपशक्तिर्लिंगादि
ब्रह्माण्डान्तं जगत् सृजेत् ।।

माया की दो शक्तियाँ है-विक्षेप शक्ति और आवरण शक्ति। विक्षेप शक्ति लिंग शरीर से लेकर ब्रह्माण्ड तक का सृजन करती है।

Two powers, undoubtedly, are predicated of Maya, viz., those of projecting are veiling. The projecting power creates everything from the subtle body to the gross universe.


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