भारतकोश
दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Drig Drishya Viveka Hindi

स्वामी भारतीतीर्थ / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Drig-Drishya Viveka with Sanskrit Shlokas and Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished34 पृष्ठ

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दृग्दृश्य विवेक | Drig Drishya Vivek


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मनोऽहंकृत्युपादानं
लिंगमेकं जडात्मकम्।
अवस्थात्रयमन्वेति
जायते म्रियते तथा।।

अन्तःकरण वृत्ति-मन तथा अहंकारवृत्ति का उपादान एक ही जड़ लिंगशरीर है। इस लिंग अथवा सूक्ष्म शरीर के आवागमन के कारण ही तीन अवस्थाओं की एवं जन्म-मरण की प्राप्ति होती है।

The subtle body which is the material cause of the mind and egoism is one and of the nature of in sentiency. It moves in the three states and is born and it dies.


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