भारतकोश
दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Drig Drishya Viveka Hindi

स्वामी भारतीतीर्थ / आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Drig-Drishya Viveka with Sanskrit Shlokas and Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished34 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 34 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 7

दृग्दृश्य विवेक | Drig Drishya Vivek


नोदेति नास्तमेत्येषा न वृद्धिं याति न क्षयम्।
स्वयं विभात्यथान्यानि भासयेत् साधनं विना।।

साक्षी चेतनता का न ही उदय होता है, और न ही अस्त होता है। इसमें कोई वृद्धि अथवा क्षय नहीं होते हैं। यह स्वयं प्रकाशित होती है, तथा बगैर किसी साधन की अपेक्षा के अन्य समस्त को प्रकाशित करती है।

This Consciousness does neither rise nor set. It does not increase; nor does it suffer decay. Being self-luminous, it illumines everything else without any other aid.


5