दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)

दृग्-दृश्य विवेक (स्वामी भारतीतीर्थ - सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Drig Drishya Viveka Hindi
स्वामी भारतीतीर्थ / आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Drig-Drishya Viveka with Sanskrit Shlokas and Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished34 पृष्ठ
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दृग्दृश्य विवेक | Drig Drishya Vivek
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चिच्छायावेशतो बुद्धौ
भानं धीस्तु द्विधा स्थिता।
एकाहंकृतिरन्या स्यात्
अन्तःकरणरूपिणी।।
बुद्धि में चेतनता का प्रतिबिम्ब पड़ते ही जड़ बुद्धि स्फूर्ति से युक्त हो जाती है। तथा इसमें जानने का सामर्थ्य जग जाता है। तत्पश्चात् यह बुद्धि दो प्रकार की विशिष्ट वृत्तियों से युक्त दिखने लगती है। प्रथम अहंकार और दूसरी अन्तःकरण वृत्ति।
Buddhi appears to possess luminosity on account of the reflection of Consciousness in it. Intelligence is of two kinds. One is designated egoity, the other as mind.
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