गान्धर्व तन्त्र (शैव-शाक्त आगम - मन्त्र-रहस्य, यन्त्र एवं देवतोपासना सटीक)

गान्धर्व तन्त्र (शैव-शाक्त आगम - मन्त्र-रहस्य, यन्त्र एवं देवतोपासना सटीक)
Gandharva Tantra with Hindi Commentary
शिव-पार्वती संवाद द्वारा
DevanagariHindipublished446 पृष्ठ
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शुद्धिपत्रम् । पृष्ठ | पङ्क्तौ | अशुद्धम् | शुद्धम् २३६ | १३ | चिन्तारापयणः | चिन्तापरायणः २४८ | १४ | पश्चिमोत्तम | पश्चिमोत्तर २५० | १५ | प्राकछ्यात् | प्राकस्थ्यात् २५१ | १८ | द्वादशाभिः | द्वादशभिः २५४ | ६ | पद्भिः | षड्भिः २५८ | ६ | अभिजायत | अभिजायते २८३ | ५ | दव्यास्तु | देव्यास्तु २८६ | १५ | च विस्तरेत् | परिस्तीर्य २६३ | ३ | समोहिनी | संमोहिनी २९३ | ३ | स्रुवण | स्रुवेण ३०६ | १६ | लज्जा | लज्जां ३१० | ११ | मदिराया | मदिरायां ३१७ | १२ | दीपान्तर | द्वीपान्तर ३२६ | १० | पशुकादर | पशुरुदार ३५२ | ४ | जैदर्भ | जैर्दभैः ३४५ | १६ | हीनजातिषु | हीनजातिषु ३५७ | २ | शक्तमाकाश | शक्तमाकाशं इति गन्धर्वतन्त्रशुद्धिपत्रम् ॥