गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 10, कुल 130 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत। ( ९ ) शैवस्य योगो नो योगो वैष्णवस्य पदस्य यः ॥ न योगो भूप सूर्य्यत्वं चन्द्रत्वंन कुबेरता ॥११॥ शिवपदकी प्राप्तिहोनी, वैष्णवपदकी प्राप्तिहोनी उसका भी नाम योग नहीं, हे राजन् ! सूर्य चंद्र और कुबेरके पदकी प्राप्ति होनेकाभी नाम योग नहीं ॥ ११ ॥ नानिलत्वं नानलत्वं नामरत्वं न कालता ॥ न वारुण्यं न नैर्ऋत्यं योगो न सार्वभौमता ॥१२॥ वायुस्वरूप, अग्निस্বরূপ, देवस्वरूप, कालस्वरूप, वरुणस्व- रूप, निर्ऋतिस्वरूप, सम्पूर्ण पृथ्वीके राजपानेका नाम भी योग नहीं है ॥ १२ ॥ योगं नानाविधं भूप युञ्जन्ति ज्ञानिनस्ततम् ॥ भवंति वितृषा लोके जिताहारा विरेतसः ॥१३॥ हे राजन् ! योग अनेक प्रकारका है, परन्तु योग वही है, जिसको प्राप्त होकर ज्ञानी लोग संसारसे विरक्त होते हैं तथा आहार जीतकर इच्छा रहित होते हैं ॥ १३ ॥ पावयन्त्यखिलांल्लोकान्वशीकृतजगत्त्रयाः ॥ करुणापूर्णहृदया बोधयन्त्यपि कांश्चन ॥१४॥