भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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(१०) गणेशगीता-अ १. ज्ञानीलोग तीनों जगत्को अपने वशमें करके सम्पूर्ण जगत्को पवित्र करते हैं, उनका हृदय दयासे पूर्ण होता है, वह किसीको बोधभी करते हैं ॥ १४ ॥ जीवन्मुक्ता ह्रदे मग्नाः परमानन्दरूपिणी ॥ निमील्याक्षीणि पश्यंतः परं ब्रह्म हृदिस्थितम् १५ वह जीवन्मुक्त होकर परमानन्दरूपी पदमें मग्न होते हैं, और नेत्रमूंदकर हृदयमें स्थित परब्रह्मका दर्शन करते हैं॥१५॥ ध्यायन्तः परमं ब्रह्म चित्ते योगवशीकृतम् ॥ भूतानि स्वात्मना तुल्यं सर्वाणि गणयन्ति ते १६ योगसे वशीभूत किये चित्तमें परब्रह्मका ध्यान करते हैं, सम्पूर्ण प्राणियोंको ज्ञानी अपनी तुल्य जानते हैं ॥ १६ ॥ येन केनचिदाच्छिन्ना येनकेनचिदाहताः ॥ येन केन चिदाकृष्टा येन केनचिदाश्रिताः ॥ १७॥ कहीं किसी कारणसे आच्छन्न कहीं किसीसे ताडित, कहीं किसीसे आकर्षित, कहीं किसीसे आश्रित ॥ १७ ॥ करुणापूर्णहृदया भ्रमन्ति धरणीतले ॥ अनुग्रहाय लोकानां जितक्रोधा जितेंद्रियाः।१८॥

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