भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( ११ ) दयापूर्ण हृदय होकर पृथ्वीमें भ्रमण करते हैं, क्रोधको जीते जितेन्द्रिय हुए, लोकोंपर अनुग्रह करनेको विचरते हैं १८ देहमात्रभृतो भूप समलोष्टाश्मकाञ्चनाः ॥ एतादृशा महाभाग्याःस्युश्चक्षुर्गोचराःप्रिय॥१९॥ हे राजन् ! वे केवल देहमात्रकोही धारण करनेहारे, मिट्टी, पत्थर सुवर्णमें समान दृष्टि करनेवाले, इस प्रकारके महाभाग पुरुष जिस योगके द्वारा दृष्टिगोचर होजाते हैं ॥ १९ ॥ तमिदानीमहं वक्ष्ये शृणु योगमनुत्तमम् ॥ श्रुत्वा यं मुच्यते जन्तुःपापेभ्यो भवसागरात् २० उस श्रेष्ठ योगको मैं तुमसे इस समय कहता हूं जिसके श्रवण करनेसे यह प्राणी पापोंसे और भवसागरसे पार हो जाता है ॥ २० ॥ शिवे विष्णौ च शक्तौ च सूर्ये मयि नराधिप॥ याऽभेदबुद्धिर्योगःस सम्यग्योगो मतो मम २१॥ हे राजन् ! शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य और मुझमें जो ,अभेद बुद्धि करनी है उसीका नाम मैं यथार्थ योग मानताहूं ॥२१॥ अहमेव जगद्यस्मात्सृजामि पालयामि च ॥ कृत्वा नानाविधं वेषं संहरामि स्वलीलया २२॥

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