भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 105

( १०४ ) गणेशगीता अ० १०. अपैशुन्यं दयाक्रोधोऽचापल्यं धृतिरार्जवम् ॥ तेजोऽभयमहिंसा चक्षमा शौचममानिता ॥ ३ ॥ चुगली न करना, दया, अक्रोध, धैर्य, अचपलता, आर्जव, तेज, अभय, अहिंसा, क्षमा, शौच, निरभिमान ॥ ३ ॥ इत्यादि चिह्नमाद्याया आसुर्याः शृणु सांप्रतम् ॥ अतिवादोऽभिमानश्च दर्पोऽज्ञानं सकोपता ॥ ४ ॥ इत्यादि चिह्नयुक्त दैवी प्रकृति समझनी । अब आसुरीके चिह्न सुनो–अतिवाद, अभिमान, दर्प, अज्ञान, क्रोध ॥ ४ ॥ आसुर्या एवमाद्यानि चिह्नानि प्रकृतेर्नृप ॥ निष्ठुरत्वं मदो मोहोऽहंकारो गर्व एव च ॥ ५ ॥ हे राजन् ! यह आसुरी प्रकृतिके चिह्न हैं, निष्ठुरता, मद, मोह, अहंकार, गर्व ॥ ५ ॥ द्वेषोऽहिंसाऽदया क्रोध औद्धत्यं दुर्विनीतता ॥ अभिचारिककर्तृत्वं क्रूरकर्मरतिस्तथा ॥ ६ ॥ द्वेष, हिंसा, अदया, क्रोध, उद्धत्ता, विनयहीनता, दूसरोंके नाशके निमित्त कर्मारंभ, क्रूर कर्मोंमें प्रीति ॥ ६ ॥ अविश्वासः सतां वाक्येऽशुचित्वं कर्महीनता ॥ निन्दकत्वं च वेदानां भक्तानामसुरद्विषाम् ॥७॥