भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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( १०८ ) गणेशगीता-अ० १०. हे राजन् ! वह भक्ति सात्त्विकी राजसी तामसी इन भेदोंसे तीन प्रकारकी है, जो भक्तिसे देवताओंको भजन करते हैं, वह सात्त्विकी भक्ति है ॥ १९ ॥ राजसी सातु विज्ञेया भक्तिर्जन्ममृतिप्रदा ॥ यद्यक्षांश्चैव रक्षांसि यजन्ते सर्वभावतः ॥ २० ॥ और राजसी भक्ति जन्म मृत्यु देनेवाली है, जिसमें सर्व भावसे यक्ष और राक्षसोंकी पूजा होती है ॥ २० ॥ वेदेनाविहितंकूरं साहंकारं सदम्भकम् ॥ भजन्ते प्रेतभूतादीन्कर्म कुर्वन्ति कामुकम्॥२१॥ वेद विधानसे रहित क्रूर अहंकार तथा दम्भता सहित जो प्रेतभूतादिकोंको भजते हैं और कामुक कर्म करते हैं ॥२१॥ शोषयन्तो निजं देहमन्तःस्थं मां दृढाग्रहाः ॥ तामस्येतादृशी भक्तिर्नृणां सा निरयप्रदा ॥२२॥ अपने देहको शोषते हैं और हृदयमें स्थित मुझकूं दृढ आग्रह करते हैं यह तामसी भक्ति है जो मनुष्योंको नरक देने- हारी है ॥ २२ ॥

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