गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ११५ ) सुखं च त्रिविधं राजन्दुःखं च क्रमशः शृणु ॥ सात्त्विकं राजसं चैव तामसं च मयोच्यते २१॥ हे राजन् ! इसी प्रकार सुख दुःखभी तीन प्रकारके हैं, वह तुम क्रमसे सुनो, इनकेभी सात्विक, राजस, तामस भेद हैं सो मैं कहता हूं ॥ २१ ॥ विषवद्भासते पूर्वं दुःखस्यान्तकरं च यत् ॥ इच्छमानं तथा वृत्त्या यदन्तेऽमृतवद्भवेत् २२॥ जो पहले तौ विषकी समान प्रतीत हो और दुःखका अन्त करनेवाला हो और मनोवृत्तिसे इच्छा किया हुआ जो अन्तमें अमृतकी समान हो ॥ २२ ॥ प्रसादात्स्वस्य बुद्धेर्यत्सात्त्विकं सुखमीरितम् ॥ विषयाणां तु यो भोगो भासतेऽमृतवत्पुरा २३॥ और जो अपनी बुद्धिको प्रसन्न करनेहारा हो,वही सात्विक सुख वर्णन किया है, और जो विषयोंका भोग प्रथम तौ अमृतकी समान विदित हो ॥ २३ ॥ हालाहलमिवान्ते यद्राजसं सुखमीरितम् ॥ तन्द्राप्रमादसंभूतमालस्यप्रभवं च यत् ॥ २४ ॥