गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२० ) गणेशगीता अ० ११. राज्य और कुटुम्बको त्यागकर वेगसे वनको चलागया, उपदेश किये योगमें यथास्थित हो मुक्त होगया ॥ ३८ ॥ इमं गोप्यतमं योगं शृणोति श्रद्धया तु यः॥ सोऽपिकैवल्यमाप्नोति यथा योगी तथैव सः ३९ इस महागुप्त योगको जो कोई श्रद्धासे श्रवण करता है,वह भी मुक्तिको प्राप्त होजाता है, जिस प्रकार योगी होते हैं॥३९॥ य इमं श्रावयेद्योगं कृत्वा स्वार्थे सुबुद्धिमान् ॥ यथा योगी तथा सोऽपि परं निर्वाणमृच्छति४० जो बुद्धिमान् इस योगको स्वार्थके निमित्त भी सुनाता है वह भी योगीकी समान मुक्त होजाता है ॥ ४० ॥ यो गीतां सम्यगभ्यस्य ज्ञात्वा चार्थं गुरोर्मुखात्। कृत्वा पूजां गणेशस्य प्रत्यहं पठते तु यः॥४१॥ जो इस गीताको भलीप्रकार अभ्यास कर गुरुमुखसे इसका अर्थ जानकर गणेशकी पूजाकर प्रतिदिन पाठ करता है॥४१॥ एककालं द्विकालं वा त्रिकालं वापि यः पठेत् ॥ ब्रह्मीभूतस्य तस्यापि दर्शनान्मुच्यते नरः ४२॥