गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १२१ ) जो एक काल दो काल वा तीनों कालमें इसको पढता हैं वह ब्रह्म स्वरूपको प्राप्त होजाता है, उसके दर्शनसे मनुष्य मुक्त होजाता है ॥ ४२ ॥ न यज्ञैर्न व्रतैर्दानैर्नाग्निहोत्रैर्महाधनैः ॥ न वेदैः सम्यगभ्यस्तैः सम्यग्ज्ञातैःसहाङ्गकैः ४३ न यज्ञ, न व्रत, न दान, न अग्निहोत्र, न महाधन, न वेदोंके उत्तम अभ्यास, न सांग ज्ञानसे ॥ ४३ ॥ पुराणश्रवणैनैव न शास्त्रैः साधुचिन्तितैः ॥ प्राप्यते ब्रह्म परममनया प्राप्यते नरैः ॥ ४४ ॥ न पुराणोंके श्रवणसे, न अच्छा चिंतन किये हुये शास्त्रोंसे ऐसी ब्रह्मकी प्राप्ति होती है, जैसी इस गीतासे मनुष्यको प्राप्त होती है ॥ ४४ ब्रह्मघ्नो मद्यपस्तेयी गुरुतल्पगमोऽपि यः ॥ चतुर्णी यस्तु संसर्गी महापातककारिणाम्॥४५॥ ब्रह्महत्यारा, मद्यपी, चोर, गुरुदारगामी, चारों वर्णोंमें गमन करनेहारे तथा और भी महापाप करनेहारे ॥ ४५ ॥