गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२२ ) गणेशगीता-अ० ११. स्त्रीहिंसागोवधादीनां कर्त्तारो ये च पापिनः ॥ ते सर्वे प्रतिमुच्यन्ते गीतामेतां पठन्ति चेत्४६॥ स्त्रीहिंसा, गोवध करनेहारे तथा और भी पापी वे सब इस गीताके पढनेसे छूट जाते हैं ॥ ४६ ॥ यः पठेत्प्रयतो नित्यं स गणेशो न संशयः ॥ चतुर्थ्यां यः पठेद्भक्त्या सोऽपिमोक्षाय कल्पते४७ जो नियमसे इसे नित्य पढते हैं वह निःसन्देह गणेश हैं, और जो चतुर्थीके दिन भक्तिसे पढते हैं, वहभी मुक्त हो जाते हैं ॥ ४७ ॥ तत्तत्क्षेत्रं समासाद्य स्नात्वाभ्यर्च्य गजाननम् ॥ सकृद्गीतां पठन्भक्त्या ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥४८॥ उनउन क्षेत्रोंमें प्राप्त होकर स्नानकर गणेशजीका पूजन कर एकवारभी भक्तिसे गीताका पाठ करै तौ, ब्रह्मस्वरूपको प्राप्त होता है ॥ ४८ ॥ भाद्रे मासे सिते पक्षे चतुर्थ्यां भक्तिमान्नरः ॥ कृत्वा महीमयीं मूर्तिं गणेशस्य चतुर्भुजाम्४९॥