भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( १२३ ) भादोंके महीनेके शुक्ल पक्षमें चौथके दिन भक्तिपूर्वक मृत्तिकाकी चतुर्भुजी मूर्ति बनाकर ॥ ४९ ॥ सवाहनां सायुधां च समभ्यर्च्य यथाविधि ॥ यः पठेत्सप्तकृत्वस्तु गीतामेतां प्रयत्नतः॥५०॥ वाहन और आयुधसहित विधिपूर्वक पूजन करके,जो यत्न- पूर्वक सातवार गीताका पाठ करता है ॥ ५० ॥ ददाति तस्य संतुष्टो गणेशो भोगमुत्तमम् ॥ पुत्रान्पौत्रान्धनं धान्यं पशुरत्नादिसंपदः ५१॥ उसको संतुष्ट होकर गणेशजी पुत्र, पौत्र, धन, धान्य, पशु, रत्नादि संपत् और अनेक भोग प्रदान करते हैं ॥ ५१ ॥ विद्यार्थिनो भवेद्विद्या सुखार्थी सुखमाप्नुयात् ॥ कामानन्याँल्लभेतकामी मुक्तिमन्तेप्रयान्तिते ५२ इति श्रीगणेशपुराणे श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु योगामृतार्थशास्त्रे श्रीगजाननवरेण्यसम्वादे त्रिविध- वस्तुविवेकनिरूपणं नामैकादशोऽध्यायः॥११॥ श्रीगजाननार्पणमस्तु ॥