भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( ३७ ) यतस्तानि पराण्याहुस्तेभ्यश्च परं मनः ॥ ततोऽपिहि परा बुद्धिरात्मा बुद्धेः परो मतः॥४२॥ स्थूलसे इंद्रिय परे हैं, इन्द्रियोंसे परे मन है, मनसे परे बुद्धि है, और बुद्धिसे परे परमात्मा है ॥ ४२ ॥ बुद्ध्वैवमात्मनात्मानं संस्तभ्यात्मानमात्मना ॥ हत्वा शत्रुं कामरूपं परं पदमवाप्नुयात् ॥४३॥ ॐ तत्सादिति श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु योगा- मृतार्थशास्त्रे श्रीगणेशपुराणे उत्तरखण्डे गजानन- वरेण्यसंवादे कर्मयोगोनामद्वितीयोऽध्यायः॥ २ ॥ इस प्रकार आत्मासे आत्माको जानकर आत्मासेही आत्माको अटल बनाकर कामरूपी शत्रुको मार परम पदको प्राप्त होता है ॥ ४३ ॥ ॐ तत्सदिति श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु योगामृतार्थ- शास्त्रे श्रीगणेशपुराणे उत्तरखण्डे गजाननवरेण्यसंवादे पंडितज्वालाप्रसादमिश्रकृतभाषाटीकायां द्वितीयोऽध्यायः ॥ २ ॥ शुभमस्तु ।