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गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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प्रस्तावना. 𑁍𑁍𑁍 संसारमें जन्म ले जिस प्राणीने अपना परलोक न सुधारा उसका जीवन कुछ इसी जन्ममें नहीं किन्तु अनेक जन्म- पर्य्यन्त वृथा गया. यह प्रसिद्ध है कि अनेक योनि हैं परन्तु मुक्तिसाधनके लिये मनुष्यशरीरही है,यह शरीर पाकर मनुष्य संसारसागरसे पार जानेके निमित्त मानों एक चरण नौकामें धर चुका. यदि दूसरे चरण रखनेका यत्न न किया तो फिर महाअंधकारमें पतित होता है। मुक्तिसाधनके निमित्त वेदान्त ग्रंथोंका विचार और उसके अनुसार कर्त्तव्य करना उचित है वेदान्तग्रंथोंमें सर्वथा ब्रह्मविद्याका प्रतिपादन किया है और उसके साधन वर्णन किये हैं जिनके श्रवण मनन निदिध्यासनसे महात्मा मुक्तिको प्राप्त होते हैं उन वेदान्तग्रंथोंमें सर्व शिरोमणि और विख्यात श्रीमद्भगवद्गीता है ऐसा कौन विद्वान् है जो इसका विचार न करताहो। जिन्हें थोडाभी ज्ञान है वह स्त्रीपुरुष पूजामें इसका पाठ अवश्य करते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता घर घर विराज रही है और उद्धार कर रही है ठीक उसीकी छायारूप श्रीमद्वेदव्यासप्रणीत गणेशपुराणान्तर्गत एकादश अध्यायमें श्रीमद्गणेशगीता है जो वेदान्तका साररूप है। इसमें श्रीगणेशजी