गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 5, कुल 130 में से
संदर्भ में पढ़ें( ४ ) प्रस्तावना । और वरेण्यराजाका संवाद है जिसमें गणेशजीने राजाको ब्रह्मविद्याका उपदेश दिया है और उसके प्रभावसे राजा मुक्ति पदवीको प्राप्त हुआहै उसी गणेशगीताकी भाषाटीका श्रीयुत परमगुणग्राही वैश्यवंशादिवाकर सेठजी श्रीखेमराज-श्रीकृष्ण- दासजीकी आज्ञासे सरल भाषामें जो सबकी समझमें आसके किया है और अक्षरार्थ स्पष्टरीतिसे लिख दिया है जिससे जिन्हें पढनेका थोडाभी ज्ञान है वह भली प्रकार समझ सकें और तदनुकूल आचरणकर शान्ति लाभ करें. यद्यपि यह ग्रंथ छोटाहै परन्तु सांख्ययोगवेदान्तका सार इसमें मथकर श्रीगणे- शजीने वर्णन कियाहै इसके अनुसार कर्त्तव्य करनेसे परम शान्तिलाभ होती है। इसके देखनेसे यह स्पष्ट विदित होता है कि ब्रह्ममय होनेसे क्या दशा होजाती है और वह किस प्रकारके वचन कहता है यह सब कुछ भगवान् गणेशजीके वचनोंने स्पष्ट कर दिया है जो गणेशजीके भक्तोंका सर्वस्व है. महात्माओंसे निवेदन है कि इसका अवलोकनकर मेरे परि- श्रमको सफल कीजिये और दृष्टिदोषसे कहीं त्रुटि रहगई हो उसे क्षमा कीजिये कारण कि सर्वज्ञ तो परमेश्वर है ॥ पं० ज्वालाप्रसाद मिश्र मुहल्ला दिनदारपुरा, मुरादाबाद.