भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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( ६ ) गणेशगीता-अ० १. इसीप्रकारसे पूर्वकालमें महात्मा शौनकके पूछनेपर सूत- जीने व्यासजीके मुखसे श्रवण कीहुई गीताको वर्णन कियाथा १ सूत उवाच । अष्टादशपुराणोक्तममृतं प्राशितं त्वया ॥ ततोऽतिरसवत्पातुमिच्छाम्यमृतमुत्तमम् ॥२॥ सूतजी बोले हे भगवन् ! वेदव्यासजी आपने अष्टादश पुरा- णका साररूप अमृत मुझे पान कराया, परन्तु अब उससेभी अधिक रसीले उत्तम अमृतपान करनेकी मुझे इच्छा है ॥२॥ येनामृतमयो भूत्वा पुमान्ब्रह्मामृतं यतः ॥ योगामृतं महाभाग तन्मे करुणया वद ॥३॥ जिस अमृतको पानकर योगी ब्रह्मरूपको प्राप्त होजाते हैं हे महाभाग ! वह कृपाकर आप मुझसे वर्णन कीजिये ॥ ३ ॥ व्यास उवाच । अथ गीतां प्रवक्ष्यामि योगमार्गप्रकाशिनीम्॥ नियुक्ता पृच्छते सूत राज्ञे गजमुखेन या ॥४॥ व्यासजी बोले हे सूतजी ! योग मार्गकी प्रकाश करने- वाली गीताका तुमसे वर्णन करताहूं कि जिसको वरेण्य