भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । (७) राजाके पूछनेपर सम्पूर्ण विघ्नोंके नाशक गणेशजीने कहाथा ॥ ४ ॥ वरेण्य उवाच । विघ्नेश्वर महाबाहो सर्वविद्याविशारद ॥ सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञ योगं मे वक्तुमर्हसि ॥५॥ वरेण्य राजा बोला कि हे विघ्न दूर करने हारे ! हे महा- भुज ! हे सर्व विद्याओंके पंडित ! हे संपूर्ण शास्त्रके तत्त्वको जानने वाले, आप मुझसे योगमार्गका वर्णन कीजिये ॥ ५ ॥ श्रीगजानन उवाच ॥ सम्यग्व्यवसिता राजन्मतिस्तेऽनुग्रहान्मम ॥ शृणु गीतां प्रवक्ष्यामि योगामृतमयीं नृप ॥६॥ श्रीभगवान् बोले. राजन्! मेरी कृपासे तुम्हारी बुद्धि निर्मल और शास्त्रको ग्रहण करनेवाली है, सुनो मैं योगाऽमृत गीता तुमसे कहताहूं ॥ ६ ॥ न योगं योगमित्याहुर्योगो योगो न च श्रियः॥ न योगो विषयैर्योगो न च मात्रादिभिस्तथा॥७॥ ‘योग” इस शब्दकाही नाम योग नहीं, लक्ष्मीकी प्राप्ति होनेका नाम योग नहीं, विषय सुखकी प्राप्ति होनेका